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करवा चौथ 2023: 100 साल बाद करवा चौथ पर बन रहा है विशेष संयोग, जानिए इस बार क्या है शुभ समय



करवा चौथ 2023 तिथि: हिंदू धर्म में करवा चौथ का असाधारण महत्व है। इस विशेष दिन पर, विवाहित महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। यह दिन शादीशुदा महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। करवा चौथ पर महिलाएं व्रत रखती हैं और रीति-रिवाज के अनुसार पूजा भी करती हैं। हिंदू कार्यक्रम के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस उत्सव में चंद्रमा महत्वपूर्ण है क्योंकि महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा निकलने के बाद ही अपना व्रत तोड़ती हैं।

करवा चौथ से जुड़ी कई मान्यताएं और रीति-रिवाज हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं। करवा चौथ का उत्सव मूल रूप से पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और राजस्थान आदि प्रदेशों में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में भी सुख बना रहता है। इस बार करवा चौथ पर 100 साल बाद महासंयोग बन रहा है। हमें इस अविश्वसनीय आकस्मिक घटना के बारे में बताएं।

कब मनाया जाएगा करवा चौथ?

महाभारत काल से ही करवा चौथ व्रत रखने की परंपरा है। तब से लेकर आज तक इस व्रत को मानकों के अनुरूप ही देखा जाता है। इस साल चतुर्थी तिथि 31 अक्टूबर को रात 10.42 बजे से शुरू हो रही है. जो अगले दिन पर पहली नवंबर को रात्रि 09:19 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत पहली नवंबर को रखा जाएगा।

चंद्रमा कब उदय होगा

चंद्रोदय 1 नवंबर 2023, उदाहरण के लिए करवा चौथ, को रात्रि 08:15 बजे होगा। करवा चौथ पूजा मुहूर्त शाम 05:36 बजे से 06:54 बजे तक रहेगा और अमृत काल शाम 07:34 बजे से 09:13 बजे तक रहेगा. अभी आप चंद्रमा को देखकर व्रत खोल सकते हैं। यह समय अत्यंत शुभ रहेगा।

अनुकूल योग बन रहा है

इस बार का करवा चौथ शादीशुदा महिलाओं के लिए बेहद खास रहेगा। इस बार 100 साल बाद चंद्रमा पर मंगल और बुध एक साथ मौजूद हैं। जिसके कारण बुध आदित्य योग बन रहा है। इसके अलावा करवा चौथ के दिन शिवयोग या शिववास और सर्वार्थ योग भी बन रहा है। अत: चालू वर्ष का करवा चौथ अत्यंत शुभ रहेगा। जो महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वैसे ही दांपत्य जीवन में भी आनंद रहेगा। ऐसा माना जाता है कि करवा चौथ के दिन माता गौरी और भगवान शिव के साथ-साथ भगवान गणेश की कृपा भी प्राप्त होती है।

करवा चौथ पूजा करने की विधि 

करवा चौथ के दिन नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर, उस समय, वृत को  करने का एक संकल्प  लें लेवे । इस दिन निर्जला व्रत रखें। बाद में आप अपनी पूजा के लिए सामग्री जुटाएं। इसके बाद घर के गर्भगृह की चौकी पर गेरू से पट्टिका बनाएं और उस पर करवा का चित्र बनाएं। फिर रात के समय उसी  स्थान पर एक उस पर कोई लाल रंग का कपड़ा बिछा दें। फिर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र  स्थापित करें।

अपनी पूजा की थाली में एक बत्ती, सिन्दूर, कुमकुम, रोली और करवा में जल भरकर रखें। फिर खड़े होकर करवा चौथ व्रत का वृत्तांत सुनें। शाम के समय चंद्रमा निकलने के बाद चंद्रदेव को प्रणाम करें और अर्घ्य दें। इसके बाद पानी पीकर अपना व्रत खोलें।


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