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आंशिक चंद्रग्रहण होगा 28 अक्टूबर की की रात को आज मनायी जाएगी शरद पूर्णिमा और 29 को, कल शाम 4 बजे से शुरू होगा जाएगा सूतक

 

Image By Pixabay

28 अक्टूबर, शनिवार को शरद पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण दोनों ही है। इस पूर्णिमा की रात  के समय खीर बनाने और खाने का रिवाज है। इस बार शाम के समय चंद्र ग्रहण रहेगा, इसका सूतक दोपहर से ही शुरू हो जाएगा, जिसके कारण शरद पूर्णिमा की शाम खीर कब बनाई जाए, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

बद्रीनाथ और उज्जैन समेत देश के कई शहरों में आज शाम (शुक्रवार, 27 अक्टूबर) शरद पूर्णिमा का उत्सव मनाया जाएगा। वहीं, रविवार 29 अक्टूबर की शाम को वृन्दावन के इस्कॉन मंदिर में शरद पूर्णिमा की खीर बनाई जाएगी, लेकिन इस साल बांके बिहारी मंदिर में शरदोत्सव नहीं रहेगा 

Timeanddate.com के अनुसार, आंशिक चंद्र अस्त 28 अक्टूबर को दोपहर 1.05 बजे शुरू होगा और दोपहर 1.44 ग्रहण का मध्य  शुरू होगा और 2.24 बजे समाप्त होगा। छाया पड़ने की अवधि लगभग 1 घंटा 19 मिनट होगी। 2023 के बाद अगला चंद्र ग्रहण 2024 में 17-18 सितंबर की शाम को होगा, जो भारत में दिखाई देगा।

28 अक्टूबर की शाम को पूरे भारत में एक ही समय पर चंद्र ग्रहणदिखाई देना चाहिए। यह भारत के साथ-साथ पूरे एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, प्रशांत, हिंद सागर में दिखाई देगा।

शरद पूर्णिमा से जुड़ी कई परंपराएं हैं, जैसे इस उत्सव की रात श्रीकृष्ण के अनन्य पूजा की जाती है, खीर बनाई जाती है, देवी लक्ष्मी का अभिषेक किया जाता है,भगवान  विष्णु या भगवान  सत्यनारायन की कथा की जाती है, जाती है। इस दिन स्वर्ग में स्नान करने और यात्रा पर जाने की भी प्रथा है।

   इस उत्सव से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। शरद पूर्णिमा को महारास की शाम भी कहा जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने इसी दिन शाम को गोपियों के साथ महारास किया था। यह भी मान्यता है कि इस पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर रहती हैं और प्रशंसकों से पूछती हैं कि कौन क्या चाहता है। इसी मान्यता के कारण इस तिथि को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

शरद पूर्णिमा का उल्लेख शास्त्रों के साथ-साथ आयुर्वेद में भी मिलता है। इस दिन शाम को चांदनी वाली खीर बनाने की प्रथा है। शाम के समय खीर बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है फिर पूर्णिमा के चाँद की किरणों मे उसे रख दिया जाता है  उसके बाद इस खीर का सेवन किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से खूब  फायदे के साथ-साथ चिकित्सीय फायदे भी मिलते हैं।

शरद पूर्णिमा की शाम चंद्रमा की किरणों में पुनर्स्थापनात्मक गुण होते हैं। जब ये किरणें खीर पर पड़ती हैं तो खीर भी स्वास्थ्यवर्धक गुण प्राप्त कर लेती है। यह खीर कई संक्रमणों से लड़ने में ताकत देती है। खीर में दूध, चावल, चीनी, सूखे प्राकृतिक उत्पाद मिलाए जाते हैं, ये सभी चीजें हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं।


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