दुकानदार के लिए दुकान ही उसकी रोजी रोटी का साधन होता है। लेकिन कई बार तो ऐसा होता है कि दुकान के वास्तु में कुछ कामिया होने की वजह से दुकान के माल की बिक्री नहीं होती या फिर बहुत धीमी होती है। इसका सीधा असर आपके व्यापार और आपके जीवन पर भी पड़ता है। इस लेख मे हम आपको बता रहे हैं वास्तु के कुछ ऐसे उपाय जिनको आप आजमाकर अपनी दुकान के वास्तुदोष से सही कर सकते हैं। आइए इस आर्टिकल मे देखते हैं क्या हैं ये उपाय।
आपने यह देखा होगा कुछ दुकानों की तरफ तो ग्राहक नजर उठाकर भी नहीं , देखते लेकिन कुछ दुकानों की तरफ ग्राहक आश्चर्यजनक व रहस्यमयी तरीके सेतो खिंचे चले जाते है। क्या आपने कभी सोचा है, आखिरकार ऐसा क्यों होता है? व्यापार में सफलता या असफलता प्रमुख रूप से कुछ वास्तु की बातों पर निर्भर करती है, जिस में दुकानदार का भाग्य,या उसकी अच्छी बुरी ग्रह-दशा होना व दुकान की वास्तु व्यवस्था भी जिम्मेदार होती है। यदि ज्योतिष व वास्तु के सही नियमों का पालन करकर , दुकान अपने परिसर में कुछ सुधार किया जाए व दुकानदार की जन्म कुण्डली के आधार पर भी कुछ उपाय जैसे शुभ रत्न धारण करना इत्यादि कराया जाए तो व्यापार में वृद्धि के साथ ही साथ दुकानदार के भाग्य में तो चार चांद लग सकते हैं।
दुकान में जिस वस्तु की बिक्री बिलकुल नहीं हो रही हो, उस वस्तु को हमेशा वायव्य कोण (उत्तर एवं पश्चिम के मध्य की दिशा ) में रखना चाहिए इस वायव्य कोण में रखी गयी वस्तु बहुत तेजी से बिक जाती हैं।
दुकान, संस्थान अथवा प्रतिष्ठान की सजावट के लिए कभी कभी कांटे वाले पेड़ पौधे जैसे की कैक्ट्स ( नागफनी ), बोन्साई आदि कभी भी नहीं लगाना चाहिए इससे दुकान की बरकत होना बंद हो जाती है, क्योंकि इससे आपके व्यवसायिक स्थल पर नागफनी , सूखे फूल , जानवरों के सिर , खाल नकारात्मक ऊर्जा को पैदा करते है। कांटेदार पौधे भी नकारात्मक ऊर्जा को पैदा कर, विषैले बाण का कार्य करते हैं, जो की बहुत ही हानिकारक सिद्ध होते है। बोनसाई का पौधा देखने में तो बहुत ही सुन्दर व आकर्षक होता है लेकिन जीवन के विकास, प्रसिद्धि , कैरियर , व्यवसाय पर गलत प्रभाव डालता है।
दुकान या ऑफिस परिसर में हमेशा ताजे कांटे रहित फूल रखना चाहिए ताकि पॉजिटिव ऊर्जा से आपकी दुकान में समृद्धि बनी रहेगी
व्यवसायिक स्थल, ऑफिस या फिर प्रतिष्ठान पर टाइटैनिक जहाज या पानी में डूबते हूए जहाज की तस्वीर कभी भी भूल कर भी नहीं लगानी चाहिए। ऐसी तस्वीरों के प्रभाव से उत्पन्न उर्जा आपके व्यापार को हानी या डूबा सकती है।
अगर दुकानदार का अपनी दुकान पर कार्य करने में मन नहीं लगता , या फिर गल्ले में बरकत नहीं होती है,आपके रूपया पैसा बराबर आता रहता है परन्तु बचत नहीं होती है तो नित्य श्री सूक्त का पाठ या फिर लक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। गल्ले में लाल कपड़ा को बिछाकर श्री यंत्र, महालक्ष्मी व कुबेर यंत्र शुभ मुहूर्त में तीनों एक साथ स्थापित करना चाहिए।
यदि आपका व्यापार बहुत मंद चल रहा है तो दक्षिण दिशा की चार दीवारी के मुंडेर पर ईटों की चिनाई कराकर उसे ऊंचा करा देवे, दक्षिण की दीवार ऊंची करने पर आप स्वयं अपने व्यवसाय में बहुत तेजी का अनुभव करेंगे।
व्यापार में लाभ, वृद्धि वं समृद्धि हेतु दुकान , संस्थान वं प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार के दोनों ओर गणेश जी की मूर्ति इस प्रकार से लगानी चाहिए कि एक की नजर दुकान के अन्दर पड़े, दुकानदार की नजर बाहर की ओर पड़े।
प्रतिदिन दुकान वं प्रतिष्ठान की सफाई करते वक्त पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर पोछा लगाना चाहिए जिससे यह नमक मिला पानी ‘नकारात्मक ’ ऊर्जा को दुकान से दूर करने में सहायक होता है। इस सरल से प्रयोग से घर, दुकान या फिर प्रतिष्ठान के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
दुकान की शटर बंद करते समय शटर के कुन्दे को पैर से कभी भी खिसकाकर बन्द नहीं करना चाहिए। शटर या फिर ताले पर लात मारने से धीरे धीरे दुकान की बिक्री प्रभावित होने लगती है।
सुबह के समय मे दुकान का ताला खोलते समय दुकान के मुख्य द्वार को हाथ से स्पर्श करके माथे से लगाना चाहिए तथा रात्रि में ताला लगाते समय भी यही प्रक्रिया फिर से दोहरानी चाहिए। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से आपके व्यवसाय में स्थायित्व तो आता ही है, साथ ही साथ साथ में दुकान की सुरक्षा भी होती है।

