दोस्तों हम वही बनते हैं जो हम सोचते हैं क्योंकि हमारी सोच ला ऑफ अट्रैक्शन का इंर्पोटेंट एस्पेक्ट है जो हमारी यूनिवर्स से वैसी ही एनर्जी को अट्रैक्ट करती है जिस तरह की एनर्जी हमारी सोच का हिस्सा है हमारी जिंदगी में हमेशा अच्छी और बुरी दोनों चॉइसेस होती हैं अगर हम एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनना चाहते हैं तो हमारी चोईसेस भी एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी ही होनी चाहिए हमारे एफर्ड्स भी एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी होनी चाहिए और फिर हमारे रिजल्ट्स ऑटोमेटेकली एक्स्ट्राऑर्डिनरी हो जाएंगे इसलिए हमें हमेशा यह देखना है कि हमने क्या सिलेक्ट किया है और यहां सिंपल मैथ्स का फार्मूला काम आता है दोस्तों लाइफ में जब चॉइस करने का मौका आता है तो दो और दो हमेशा चार ही होते मतलब अगर आपकी चॉइस गलत तो रिजल्ट भी गलत और सही तो आप दुनिया के सबसे सही इंसान है मतलब हम वही बनते हैं जो हम सोचते हैं अपनी जिंदगी की स्टोरी में भी अगर हमने खुद को हीरो का रोल नहीं दिया तो हम अपनी ही जिंदगी की स्टोरी को अपने हिसाब से कैलकुलेट नहीं कर सकते , डिजाइन नहीं कर सकते उसमें चेंज नहीं ला सकते उसे अपने अनुसार जी नहीं सकते अभी तक तो आपकी लाइफ में जो हो रहा है वह आपके लिए ईश्वर ने सेट किया है आप अभी तक फ़्लो के साथ साथ बह रहे हैं लेकिन आप चाहे तो आपकी लाइफ में बहुत कुछ बदल सकता है आप कहेंगे कि किस्मत में लिखे फैसले बदला नहीं करते लेकिन दोस्तों हम इतना ही कहेंगे कि फैसले लेने वालों की किस्मत जरूर बदल जाती है इसलिए लाईफ को डिजाइन करने के लिए कुछ सोचने की , कुछ प्लान करने की रिस्पांसिबिलिटी अब आपकी है आपको सोचना है कि आप क्या चाहते हैं आपको खुद से अपनी लाइफ की डायरेक्शन को डिसाइड करना है लेखक कहते हैं कि लाइफ को डिजाइन करने का सबसे पहला स्टेप है अपनी सोच में पॉजिटिव चेंज लाना क्योंकि अगर आप जिंदगी के प्रति पॉजिटिव एटीट्यूड लेकर चलते हैं तो आप की प्रोडक्टिविटी का बढ़ना तय है आपके थॉट्स बिल्कुल एक शीट की तरह है और जिस तरह की शीट आप अपने मन के अंदर लगाएंगे जिस तरह की खाद पानी को देकर उसे बड़ा करेंगे पेड़ भी उसी तरह का उगेगा बीज अपना बेसिक नेचर कभी नहीं छोड़ेगा जिस तरह आप बबूल के बीज बोकर आम का पेड़ नहीं उगा सकते ठीक उसी तरह अगर आपने गलती से भी मन के अंदर नेगेटिविटी के बीज बो दिये है तो पॉजिटिविटी का ट्री कभी भी नहीं उग सकता हम अपने थॉट्स को निगेटिव स्फेयर में भटकने से नहीं रोक सकते क्योंकि हम इंसान हैं भगवान नही लेकिन हमें अपने इंसान होने को ही अपना स्ट्रांग पॉइंट बनाना है इंसान के पास सही और गलत चुनने के लिए इंटेलिजेंस है वह समझ सकता है कि उसके लिए सही क्या है और गलत क्या है इसलिए जब भी हमें लगे कि हमारे आसपास का इन्वायरमेंट हमारे आसपास के लोग नेगेटिव हो रहे हैं तो हमें अपने आप को प्रोटेक्ट करना है इससे दूर भागना है यूं कहिए कि जंप लगा कर पॉजिटिविटी की लक्ष्मण रेखा के अंदर आ जाना है यही लक्ष्मण रेखा हमें बचा सकती है जिस तरह केरमबोर्ड एक प्लेयर हमेशा अपनी क्वाविन को कवर करके रखता है उस पर होने वाले हर अटैक को कैलकुलेट करके अपनी चाल चलता है वैसे ही हमें अपने माइंड को अपने थॉट्स को प्रोटेक्ट करके रखना बहुत जरूरी है अपने एनवायरमेंट की नेगेटिविटी को कैलकुलेट करना है अपनी पॉजिटिविटी को हमेशा आर्मर की तरह यूज करना है जिससे टकराकर सारी नेगेटिविटी पीछे मुड़कर लौट जाए अगर आपके दोस्त रिलाटिव यहा तक की पेरेंट्स भी आपके थॉट्स को गंदा कर रहे हैं आप को पॉजिटिव एनर्जी नहीं दे रहे हैं तो उनसे भी दूरी बना लीजिए हो सकता है कि आपके लिए अपने पुराने रिश्तो को छोड़ना मुश्किल हो रहा हो क्योंकि बहुत सारे लोग आपकी जिंदगी का अहम हिस्सा होते हैं आप चाहकर भी उन्हें नहीं छोड़ सकते तो नए फ्रेंड्स बनाइए जो आपको पॉजिटिव और गुड एनर्जी दे पेरेंट्स को भी रिगार्ड कीजिए लेकिन उनकी परसेप्शन पर अपनी लाइफ का डिसीजन मत लीजिए लाइफ में लूजर की तरह विक्टिम कार्ड खेलना सबसे आसान होता है इसको उसको हालात को ब्लेम करना लाइफ का सबसे आसान काम है लेकिन इससे क्या होता है हम जिंदगी भर ब्लेम गेम ही खेलते रह जाते हैं जिंदगी में कुछ भी नहीं बदलता दोस्तो हमारी सच्चाई यही है कि हम हमेशा हालात को बदलने में लगे रहते हैं खुद को बदलना है यह सोच ही नहीं पाते है हम हमेशा हालात को दोष देते हैं खुद मे गलतिया नही ढुढ़ते है यह हम सब की लाइफ की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है कि हम सेल्फ इवेलुएशन करना ही नहीं चाहते हम जानना ही नहीं चाहते कि हमारे फैलियर होने का हमारे अनसक्सेसफुल होने का रियल रीजन क्या है हम बस ब्लेम करने में विश्वास करते हैं दुश्मन को कोसने में वक्त बिताते हैं और ऐसा करके अपने आप में कई गुना नेगेटिव हो जाते हैं अगर आप हालात को बदलना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने थॉट्स को बदलना पड़ेगा क्योंकि थॉट्स को बदल कर ही आप अपनी कंडीशन को बदल सकते हैं यह ला ऑफ अट्रैक्शन है कि हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं हमारी सोच हर वक्त हर समय हमारे दिमाग को कंट्रोल करते रहती है अगर हम हर वक्त यह सोचते हैं कि हम सफल नहीं है तो दुनिया का कोई भी पावर है हमें सफल बना ही नहीं सकता क्योंकि हमने अपने दिमाग को चारों तरफ से नेगेटिविटी से कवर करके रखा है कसकर बंद कर रखा है जब तक हम उसमें पॉजिटिविटी को एंट्री नहीं देने देंगे सब कुछ सही नहीं हो सकता जब तक आप अपने थॉट्स को सक्सेस खुशियो को आईडेंटिफाई करने के लिए सिग्नल नहीं देंगे तब आपका ब्रेन ना सर्च कर सकता है ना ही उन्हें अचीव कर सकता है जैसे अगर इस समय आपका ब्रेकअप हुआ है तो आपको अच्छे रोमांटिक सोंग्स पसंद नहीं आएंगे आप इस समय आप ढूंढ ढूंढ कर सैड सोंग्स लाएंगे और सुनेंगे और फिर ज्यादा दुखी हो जाएंगे क्योंकि आपके थॉट्स ब्रेन को सेडनेस का सिग्नल दे रहे हैं जब आप खुश रहने का सोचेंगे तभी आप खुश होंगे और जब आप सफल होने का सोचेंगे तभी आप सफल होंगे क्योंकि इंसान का थॉट प्रोसेस उसकी कॉन्शियस और अनकॉन्शियस माइंड को कंडीशन करता है और जब हम एक ही थॉट को एक ही प्रोसेस को रिपीट करते हैं तो हमारे सबकॉन्शियस माइंड में ये एक डेटा की तरह फिड हो जाता है ये अपने मोबाइल पर मैसेज टाइप करने की तरह है आप अल्फा बेट को सर्च नहीं करते आपकी सबकॉन्शियस मेमोरी आपकी फिंगर्स को गाइड करती है सारे डेटा का सही यूस करके आपका मनचाहा मैसेज टाइप करती है आपके थॉट प्रोसेस साथ भी यही होता है
आप की सोच आपकी पहचान MOTIVATION
सितंबर 08, 2022
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दोस्तों हम वही बनते हैं जो हम सोचते हैं क्योंकि हमारी सोच ला ऑफ अट्रैक्शन का इंर्पोटेंट एस्पेक्ट है जो हमारी यूनिवर्स से वैसी ही एनर्जी को अट्रैक्ट करती है जिस तरह की एनर्जी हमारी सोच का हिस्सा है हमारी जिंदगी में हमेशा अच्छी और बुरी दोनों चॉइसेस होती हैं अगर हम एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनना चाहते हैं तो हमारी चोईसेस भी एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी ही होनी चाहिए हमारे एफर्ड्स भी एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी होनी चाहिए और फिर हमारे रिजल्ट्स ऑटोमेटेकली एक्स्ट्राऑर्डिनरी हो जाएंगे इसलिए हमें हमेशा यह देखना है कि हमने क्या सिलेक्ट किया है और यहां सिंपल मैथ्स का फार्मूला काम आता है दोस्तों लाइफ में जब चॉइस करने का मौका आता है तो दो और दो हमेशा चार ही होते मतलब अगर आपकी चॉइस गलत तो रिजल्ट भी गलत और सही तो आप दुनिया के सबसे सही इंसान है मतलब हम वही बनते हैं जो हम सोचते हैं अपनी जिंदगी की स्टोरी में भी अगर हमने खुद को हीरो का रोल नहीं दिया तो हम अपनी ही जिंदगी की स्टोरी को अपने हिसाब से कैलकुलेट नहीं कर सकते , डिजाइन नहीं कर सकते उसमें चेंज नहीं ला सकते उसे अपने अनुसार जी नहीं सकते अभी तक तो आपकी लाइफ में जो हो रहा है वह आपके लिए ईश्वर ने सेट किया है आप अभी तक फ़्लो के साथ साथ बह रहे हैं लेकिन आप चाहे तो आपकी लाइफ में बहुत कुछ बदल सकता है आप कहेंगे कि किस्मत में लिखे फैसले बदला नहीं करते लेकिन दोस्तों हम इतना ही कहेंगे कि फैसले लेने वालों की किस्मत जरूर बदल जाती है इसलिए लाईफ को डिजाइन करने के लिए कुछ सोचने की , कुछ प्लान करने की रिस्पांसिबिलिटी अब आपकी है आपको सोचना है कि आप क्या चाहते हैं आपको खुद से अपनी लाइफ की डायरेक्शन को डिसाइड करना है लेखक कहते हैं कि लाइफ को डिजाइन करने का सबसे पहला स्टेप है अपनी सोच में पॉजिटिव चेंज लाना क्योंकि अगर आप जिंदगी के प्रति पॉजिटिव एटीट्यूड लेकर चलते हैं तो आप की प्रोडक्टिविटी का बढ़ना तय है आपके थॉट्स बिल्कुल एक शीट की तरह है और जिस तरह की शीट आप अपने मन के अंदर लगाएंगे जिस तरह की खाद पानी को देकर उसे बड़ा करेंगे पेड़ भी उसी तरह का उगेगा बीज अपना बेसिक नेचर कभी नहीं छोड़ेगा जिस तरह आप बबूल के बीज बोकर आम का पेड़ नहीं उगा सकते ठीक उसी तरह अगर आपने गलती से भी मन के अंदर नेगेटिविटी के बीज बो दिये है तो पॉजिटिविटी का ट्री कभी भी नहीं उग सकता हम अपने थॉट्स को निगेटिव स्फेयर में भटकने से नहीं रोक सकते क्योंकि हम इंसान हैं भगवान नही लेकिन हमें अपने इंसान होने को ही अपना स्ट्रांग पॉइंट बनाना है इंसान के पास सही और गलत चुनने के लिए इंटेलिजेंस है वह समझ सकता है कि उसके लिए सही क्या है और गलत क्या है इसलिए जब भी हमें लगे कि हमारे आसपास का इन्वायरमेंट हमारे आसपास के लोग नेगेटिव हो रहे हैं तो हमें अपने आप को प्रोटेक्ट करना है इससे दूर भागना है यूं कहिए कि जंप लगा कर पॉजिटिविटी की लक्ष्मण रेखा के अंदर आ जाना है यही लक्ष्मण रेखा हमें बचा सकती है जिस तरह केरमबोर्ड एक प्लेयर हमेशा अपनी क्वाविन को कवर करके रखता है उस पर होने वाले हर अटैक को कैलकुलेट करके अपनी चाल चलता है वैसे ही हमें अपने माइंड को अपने थॉट्स को प्रोटेक्ट करके रखना बहुत जरूरी है अपने एनवायरमेंट की नेगेटिविटी को कैलकुलेट करना है अपनी पॉजिटिविटी को हमेशा आर्मर की तरह यूज करना है जिससे टकराकर सारी नेगेटिविटी पीछे मुड़कर लौट जाए अगर आपके दोस्त रिलाटिव यहा तक की पेरेंट्स भी आपके थॉट्स को गंदा कर रहे हैं आप को पॉजिटिव एनर्जी नहीं दे रहे हैं तो उनसे भी दूरी बना लीजिए हो सकता है कि आपके लिए अपने पुराने रिश्तो को छोड़ना मुश्किल हो रहा हो क्योंकि बहुत सारे लोग आपकी जिंदगी का अहम हिस्सा होते हैं आप चाहकर भी उन्हें नहीं छोड़ सकते तो नए फ्रेंड्स बनाइए जो आपको पॉजिटिव और गुड एनर्जी दे पेरेंट्स को भी रिगार्ड कीजिए लेकिन उनकी परसेप्शन पर अपनी लाइफ का डिसीजन मत लीजिए लाइफ में लूजर की तरह विक्टिम कार्ड खेलना सबसे आसान होता है इसको उसको हालात को ब्लेम करना लाइफ का सबसे आसान काम है लेकिन इससे क्या होता है हम जिंदगी भर ब्लेम गेम ही खेलते रह जाते हैं जिंदगी में कुछ भी नहीं बदलता दोस्तो हमारी सच्चाई यही है कि हम हमेशा हालात को बदलने में लगे रहते हैं खुद को बदलना है यह सोच ही नहीं पाते है हम हमेशा हालात को दोष देते हैं खुद मे गलतिया नही ढुढ़ते है यह हम सब की लाइफ की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है कि हम सेल्फ इवेलुएशन करना ही नहीं चाहते हम जानना ही नहीं चाहते कि हमारे फैलियर होने का हमारे अनसक्सेसफुल होने का रियल रीजन क्या है हम बस ब्लेम करने में विश्वास करते हैं दुश्मन को कोसने में वक्त बिताते हैं और ऐसा करके अपने आप में कई गुना नेगेटिव हो जाते हैं अगर आप हालात को बदलना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने थॉट्स को बदलना पड़ेगा क्योंकि थॉट्स को बदल कर ही आप अपनी कंडीशन को बदल सकते हैं यह ला ऑफ अट्रैक्शन है कि हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं हमारी सोच हर वक्त हर समय हमारे दिमाग को कंट्रोल करते रहती है अगर हम हर वक्त यह सोचते हैं कि हम सफल नहीं है तो दुनिया का कोई भी पावर है हमें सफल बना ही नहीं सकता क्योंकि हमने अपने दिमाग को चारों तरफ से नेगेटिविटी से कवर करके रखा है कसकर बंद कर रखा है जब तक हम उसमें पॉजिटिविटी को एंट्री नहीं देने देंगे सब कुछ सही नहीं हो सकता जब तक आप अपने थॉट्स को सक्सेस खुशियो को आईडेंटिफाई करने के लिए सिग्नल नहीं देंगे तब आपका ब्रेन ना सर्च कर सकता है ना ही उन्हें अचीव कर सकता है जैसे अगर इस समय आपका ब्रेकअप हुआ है तो आपको अच्छे रोमांटिक सोंग्स पसंद नहीं आएंगे आप इस समय आप ढूंढ ढूंढ कर सैड सोंग्स लाएंगे और सुनेंगे और फिर ज्यादा दुखी हो जाएंगे क्योंकि आपके थॉट्स ब्रेन को सेडनेस का सिग्नल दे रहे हैं जब आप खुश रहने का सोचेंगे तभी आप खुश होंगे और जब आप सफल होने का सोचेंगे तभी आप सफल होंगे क्योंकि इंसान का थॉट प्रोसेस उसकी कॉन्शियस और अनकॉन्शियस माइंड को कंडीशन करता है और जब हम एक ही थॉट को एक ही प्रोसेस को रिपीट करते हैं तो हमारे सबकॉन्शियस माइंड में ये एक डेटा की तरह फिड हो जाता है ये अपने मोबाइल पर मैसेज टाइप करने की तरह है आप अल्फा बेट को सर्च नहीं करते आपकी सबकॉन्शियस मेमोरी आपकी फिंगर्स को गाइड करती है सारे डेटा का सही यूस करके आपका मनचाहा मैसेज टाइप करती है आपके थॉट प्रोसेस साथ भी यही होता है
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