नमस्कार आपका स्वागत है मित्रो शिव महापुराण मे पत्नियों से संबंधित कुछ नियमों का वर्णन किया गया है यह सभी नियम एक ब्राह्मण स्त्री ने ने माता पार्वती को बताई थी आइये जान लेते है वह कौन से नियम है
सबसे पहली बात -
पति बूढ़ा हो गया हो तो भी पतिव्रता पत्नी को अपने पति का साथ कभी भी छोड़ना नहीं चाहिए जीवन के हर सुख दुख में पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए अपने पति की गुप्त बात भी किसी को नही बताना चाहिए जीवन के हर सुख दुख में पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए
दूसरी बात -
पत्नी को बिना श्रंगार किए अपने पति के सामने जाना नही चाहिए जब पति किसी परदेश को जा रहा हो तो उस समय श्रंगार नही करना चाहिए पतिव्रता स्त्री को कभी अपने पति का नाम नही लेना चाहिए पति के भला बुरा कहने पर भी चुप ही रहना चाहिए
तीसरी बात -
पति के बुलाने पर तुरंत ही उसके पास जाना चाहिए और पति जो भी आदेश दे उसका पसन्नता पूर्वक पालन करना चाहिए
चौथी बात -
पतिव्रता स्त्री को अपने पति की आज्ञा के बिना काही पर भी जाना नही चाहिए पति के बिना मेले का, उत्सव का, त्याग कर देना चाहिए पति की आज्ञा के बिना व्रत व उपवास भी नही करना चाहिए
पाँचवी बात -
पतिव्रता स्त्री को पसन्नता पूर्वक घर के सभी कार्य करना चाहिए आधिक खर्च किए बिना ही परिवार का पालन पोषण ठीक से करना चाहिए देवता , पित्र , अतिथि, गाय व भिक्षुकों को अन्न का भाग दिये बिना स्वयं भोजन नही करना चाहिए
छतवी बात -
धर्म मे तत्पर रहने वाली स्त्री को अपने पति के भोजन कर लेने के बाद ही भोजन करना चाहिए जब पति खड़ा हो तो पत्नी को भी खड़ा रहना चाहिए उसकी आज्ञा के बिना बैठना नही चाहिए पति की सोने के बाद सोना चाहिए और जागने से पहले जाग जाना चहिए
सातवी बात-
राजस्वला होने पर पत्नी को तीन दिनो तक पति के मुख के दर्शन नही करना चाहिए अर्थात उससे अलग रहना चाहिए जब तक वह स्नान करके शुद्ध न हो जाय तब तक अपनी कोई बात भी पति के कानो मे पड़ने नही देनी चाहिए
आठवि बात-
मैथुन काल के अलावा किसी अन्य समय पति के सामने दृष्टता यानि दुसाहस नही करना चाहिए पतिव्रता स्त्री को ऐसा काम करना चाहिए जिससे पति का मन प्रसन्न हो ऐसा कोई काम नही करना चाहिए जिससे की पति के मन मे विषाद उत्पन्न हो
नौवि बात -
पति की आयु बढ़ाने वाली अभिलाषा वाली स्त्री को हल्दी, रुई, सिंदूर, काजल, मांगलिक आभूषण, केशो को सवारना, हाथ ,कान के आभूषण इन सभी को अपने से दूर करना नही चाहिए यानि पति की प्रस्न्न्ता के लिए सज सवर कर रहना चाहिए
दसवी बात-
पतिव्रता स्त्री को सुख और दुख दोनों ही स्थिति मे अपने पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए यानि की घर मे किसी भी वस्तु की आवश्यकता आन पड़े तो अचानक ये बात नही कहनी चाहिए बल्कि पहले अपने मधुर वचनो से पति को प्रस्स्न्न करना चाहिए उसके बाद ही उस वस्तु के बारे मे बताना चाहिए
ग्यारहवि बात-
जो स्त्री अपने पति को बाहर से आते देखकर अन्न जल आदि से उसकी सेवा करती है मीठे वचन बोलती है वह तीनों लोको को संतुष्ट कर देती है पतिव्रता स्त्री के पुण्य से पिता माता और कुलो की तीन पीढ़ियो के लोग स्वर्गलोक मे सुख भोगते है
बारहवि बात-
रजो निवर्ति के बाद शुद्धतापूर्वक स्न्नान करके सबसे पहले अपने पति का चेहरा देखना चाहिए अन्य किसी का नही आगर पति ना हो तो भगवान सूर्यसदेव का दर्शन करना चाहिए
तेरहवि बात-
पतिव्रता स्त्रियो को चरित्रहीन स्त्री के साथ बात भी नही करनी चाहिए पति से द्वेष रखने वाली स्त्री का कभी आदर नही करना चाहिए और कभी भी पति के अलावा सुनसान स्थान पर अकेले नही खड़ा रहना चाहिए

