वास्तु शास्त्र के अनुसार सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर एवं उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर रहता है। इसलिए दर्पण हमेशा पूर्व और उत्तर दिशा वाली दीवारों और दर्पण लगये जाने वाले स्थानो पर इस प्रकार लगाना चाहिए कि देखने वाले का मुख पूर्व या उत्तर में रहे। इन दिशाओं में दर्पण लगाने से जीवन में उन्नति होती है एवं धन लाभ के अवसर बढ़ जाते हैं। पश्चिम या दक्षिण दिशा की दीवारों या स्थानो पर लगे दर्पण,पूर्व और उत्तर से आ रही सकारात्मक ऊर्जाओं को रिफ्लेक्ट कर देते हैं।तो चलिये दोस्तो जानते है हमे दर्पण कहा लगाना चाहिए और कहा पर नही
पहली बात -बेड़रूम में दर्पण
यह हमेशा ध्यान रखे की बेडरूम मे दर्पण ना लगाए ऐसा करने से आपके दाम्पत्य जीवन में विश्वास की कमी आती है तथा इसके साथ ही पति-पत्नी में आपसी मतभेद भी होता रहता है एवं पति पत्नी को कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं,पति व पत्नी दोनों को ही दिनभर थकान महसूस होती है,शरीर मे आलस्य बना रहता है। यदि बेडरूम मे ड्रेसिंग टेबल रखना जरूरी ही हो तो उसे इस तरह रखें कि सोने वालों का प्रतिबिम्ब उसमें दिखाई न दे,या फिर सोने से पहले दर्पण ढक दें। यह भी ध्यान रहे कि जहां दर्पण लगा हो उसमें नकारात्मकता के प्रभाव को बढ़ाने वाली वस्तुओं का प्रतिबिम्ब दिखाई न देवे ।
दूसरी बात-सावधानी से लगाएं बाथरूम में दर्पण
हम सभी यह बहुत अच्छी तह से जानते है की फेस वॉश करने के बाद या स्नान करने के बाद खुद को देखने के लिए हम बाथरूम में दर्पण लगाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम में दर्पण लगाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दर्पण दरवाजे के ठीक सामने नहीं हो क्योकि दर्पण का काम होता है प्रवर्तन यानि रिफ्लेक्ट करना,जब हम बाथरूम में प्रवेश करते हैं तो हमारे साथ सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा दोनों ही बाथरूम में प्रवेश करती है तथा जब हम सोकर उठते है तब नकारात्मक ऊर्जा की मात्रा अधिक होती है जो की दरवाजे के सामने दर्पण होने से हमारे साथ जो भी ऊर्जा बाथरूम में प्रवेश करती है वह वापस घर में लौट आती है इस प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को दूर करने के लिए बाथरूम में दर्पण इस प्रकार से लगाना चाहिए ताकि इसका रिफ्लेक्शन बाथरूम से बाहर की ओर नहीं हो ।
तीसरी बात- टूटा हुआ दर्पण
दोस्तो हमे साफ़,स्पष्ट एवं वास्तविक छवि दिखाई देने वाला दर्पण ही काम में लेना चाहिए नुकीला अथवा चटका हुआ या धुंधला दिखाई देने वाला दर्पण अनेक समस्याओं जन्म देने वाला कारण बन सकता है। दर्पण जितने हल्के और बड़े होंगे,उनका प्रभाव उतना ही अच्छा और सकारात्मक होगा । शुभफलों में वृद्धि के लिए दीवार पर आयताकार ,वर्गाकार या अष्टभुजाकार दर्पण लगाने का पूरा प्रयास करें।

