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आपके अंदर का डर ! Fear ko kaise dur kare

 आपके अंदर का डर Fear ko kaise dur kare 



दोस्तों,आज हम बात करेंगे एक ऐसे टॉपिक के बारे मे, जो हम सबके साथ होता है,डर या फियर,चाहे वह एग्जाम का हो, इंटरव्यू का हो,या किसी भी नए काम को शुरू करने का हो, लेकिन डर को जीतना ही,जिंदगी में आगे बढ़ने का पहला कदम है, डर काे जीतकर ही चुनाौतियों का सामना किया जाता है, मगर कुछ लोग काम शुरू करने से पहले ही,डर कर हार मान लेते हैं, ऐसे डरे-सहमे लोग अपने सपनों की मंजिल से दूर ही रह जाते हैं,इससे बचने का एक ही तरीका है और वो है डर का सामना करना,तभी तो कहा जाता है कि डर के आगे जीत है,आज मैं आपको बताऊँगा कि डर को कैसे खत्म किया जा सकता है,

पहला पॉइंट-सबसे पहले यह समझना जरूरी है,कि डर इंसानी नेचर का ही एक हिस्सा है दोस्तों 

“डर तो सिर्फ और सिर्फ दिमाग के अंदर है,

जो उससे जीत जाए वो ही सिकंदर है”  

डर हमारे सर्वाइवल मैकेनिज्म का एक पार्ट है,लेकिन जब यह हमारी डिसीजन को रोकने लगता है,तो यह आपकी ग्रोथ में रुकावट बन जाता है,इसे एक एग्जांपल से समझते हैं,मान लो एक लड़का था ‘पवन’, जो स्कूल के दिनों में बहुत शाय और रिजर्व्ड था,जब भी स्टेज पर जाने का मौका आता था,उसके पांव काँपने  लगते थे,उसको लगता था कि सब उस पर हसेंगे,लेकिन एक दिन उसके टीचर ने उसका हाथ पकड़ के कहा,’पवन’अगर तुम आज एक कदम स्टेज पर रखोगे,तो एक दिन तुझे किसी भी स्टेज पर जाने मे डर नहीं लगेगा,

दूसरा पॉइंट-छोटा कदम लो,और एक्शन में बढ़ते रहो,डर को जीतने का सबसे आसान और सिंपल तरीका है कि,हम छोटे-छोटे कदम उठाए,अगर हम सिर्फ सोचेंगे तो डर बढ़ता रहेगा,लेकिन अगर एक्शन लेना शुरू कर देंगे,तो वो डर धीरे धीरे खत्म होने लगेगा,तो समझते हैं उसी पवन के एग्जांपल से,फिर ’पवन’ ने अपने टीचर की बात मान ली,उसने पहले क्लास के सामने बोलने की प्रैक्टिस की,फिर छोटे कंपटीशन में पार्टिसिपेट करना शुरू किया,फिर धीरे-धीरे उसका डर खत्म होने लगा,और एक दिन ऐसा आया कि उसने स्कूल के एनुअल फंक्शन में स्टेज पर जाकर बहुत ही अच्छी सी स्पीच दी,जिससे सभी बच्चे इंप्रेस हो गए,दोस्तों कहना यह है की,

“मैं भी डर गया था मुश्किलें देखकर

फिर आगे बढ़ गया मंजिलें देखकर,

खुद राहें मुझे मिलती चली गईं,मुश्किलें हार गईं मेरा हौसला देखकर ,

तीसरा पॉइंट-गलतियों से सीखना और फेलियर को एक्सेप्ट करना सीखें,जब हम डर के आगे बढ़ते हैं ना तो कहीं ना कहीं गलतियां होंगी ही,लेकिन गलतियों से डरना नहीं है,हमें उससे सीखना है, फेलियर सिर्फ एक लेसन है,जो हमें और स्ट्रांग बनाता है,’पवन’ के एग्जांपल से सीखते हैं,’पवन’ने भी अपने पहले अटेंप्ट में गलतियां की थी,वो भूल गया था,कि मुझे क्या कहना है,और उसके दोस्त उस पर हंसने भी लगे थे,लेकिन उसने वो एंबेरेसमेंट को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया,उसने प्रैक्टिस की,फोकस बढ़ाया,और अगली बार जब स्टेज पर आया ना तो बहुत ही कॉन्फिडेंटली बोला,

मंजिल की खोज में जो पहले ही डर जाते हैं,
अपने मुकाम से वो बहुत दूर चले जाते हैं,

तो अब बात करते हैं

फोर्थ पॉइंट की- डर को,जीवन का एक पार्ट समझो,हमें डर को एक हिस्सा मानकर आगे बढ़ना चाहिए,डर को समझना और उसे एक्सेप्ट करना ही उससे जीतने का पहला कदम है,जब हम अपने कंफर्ट जोन से बाहर आते हैं, तो ग्रोथ वहीं से शुरू होती है, इसे समझते हैं ‘पवन’ के लास्ट लेसन से, आज ‘पवन’ एक सक्सेसफुल पब्लिक स्पीकर बन गया है, उसने अपने डर का सामना किया,उससे सीखा और हर स्टेज पर कॉन्फिडेंटली बोलने लगा,’पवन’ की इस जर्नी से यह समझना जरूरी है कि अगर हम छोटी शुरुआत करें, कंसिस्टेंटली प्रैक्टिस करें,और अपने फेलियर से सीखें,तो डर को हम जीत सकते हैं,तो दोस्तों डर को एक टूल की तरह देखो,जो आपको और स्ट्रांग बना सकता है,आज से ही एक छोटा कदम उठाओ और अपने डर का सामना करो,अपने एक्सपीरियंस कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें


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