प्रमोशन मे आरक्षण
मध्यप्रदेश देश का एकमात्र एकलौता राज्य जिसने प्रोमोशान रोक रखे है 1 लाख से अधिक कर्मचारी बिना प्रमोशन के रिटायर हो गए
देश में मध्य प्रदेश इकलौता ऐसा राज्य है जहां 6 साल से प्रमोशन पर रोक है जबकि महाराष्ट्र कर्नाटक उत्तर प्रदेश उत्तराखंड छत्तीसगढ़ राजस्थान गुजरात में कर्मचारियों को प्रमोशन दिए जा रहे हैं, इसमें एक खास बात यह है कि मध्य प्रदेश से अलग होकर साल 2000 में बने छत्तीसगढ़ में भी पदोन्नति नहीं रुकी है ,प्रमोशन में आरक्षण को लेकर विवाद की स्थिति केंद्र सरकार मध्य प्रदेश बिहार त्रिपुरा एवं पंजाब राज्य में लेकिन कोर्ट के आदेश की प्रत्याशा में भी इन राज्यो पदोन्नति हो रही है मध्यप्रदेश में चुनिंदा एकल पदों पर ही प्रमोशन किए गए हैं जबकि उत्तर प्रदेश उत्तराखंड राज्यों में तो प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था पूरी तरह खत्म की जा चुकी है प्रदेश में 6 साल में एक लाख से अधिक कर्मचारी अधिकारी बिना प्रमोशन के रिटायर हो गए हैं वर्ष 2022 - 2023 में भी करीब दस हजार कर्मचारी अधिकारी रिटायर हों जाएगे , मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट का आदेश आने के पहले तक 2002 के नियमों के अनुसार ही पदोन्नति होती रही है जिससे प्रदेश में उच्च पदों पर आरक्षित श्रेणी से भरे गए हैं मंत्रालय में स्थिति यह है कि एडिशनल सेक्रेटरी के तीनों पद खाली पड़े हुए हैं जबकि डिप्टी सेक्रेटरी के कुल बारह पदों में से सिर्फ एक पद आरक्षित श्रेणी से भरा गया है तथा इन पदों पर आनाआरक्षित वर्ग का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नहीं है अवर सचिव के 58 पदों में से 27 पद भरे जा चुके हैं जिनमें से एक अनारक्षित एवं बाकी आरक्षित पदों से भरे गए हैं, इसी प्रकार निर्माण विभाग में लोक निर्माण विभाग में एनएनसी के 3 पद आरक्षित वर्ग से भरे गए हैं, चीफ इंजीनियर के 20 पदों में से 14 पद आरक्षित श्रेणी से भरे गए हैं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और जल संसाधन को भी यही स्थिति है
मध्य प्रदेश को किन किन बिंदुओं का करना होगा परीक्षण और समीक्षा
एम नागराज और जनरल सी के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार मानते हुए मध्य प्रदेश में 2000 केडर में पदोन्नति आरक्षण देने के लिए यह सिद्ध करना होगा कि इन का प्रतिनिधित्व अपर्याप्त है
यह सुनिश्चित करना होगा कि केडर वार प्रतिनिधित्व के जो भी मापदंड निश्चित किए जाएंगे उनकी समय सीमा में समीक्षा करना इसलिए जरूरी है कि मध्य प्रदेश सरकार के हिसाब से अभी भी जो पदोन्नति नियम 2002 के ही वो 20 साल पुराने प्रभावशील किए गए हैं
मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति का सीधी भर्ती में 20% और अनुसूचित जाति का 16% है तो यह भर्ती में है जैसे जैसे उच्चतम पर जाएंगे मध्य प्रदेश सरकार को इसे कम करना होगा
प्रमोशन ना हाईकोर्ट ने रोके ना सुप्रीम कोर्ट ने फिर मध्यप्रदेश में क्यों रख रखे हैं क्यों रोक रखे हैं
30 अप्रैल 2016 से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के 2002 में बनाए गए पदोन्नति में आरक्षण के नियमों को असंवैधानिक करार देते हुए आरक्षण रोस्टर को निरस्त कर दिया गया था कोर्ट ने इन नियमों के हिसाब से जो भी पदोन्नति हुई है उन्हें रिवर्ट करने का आदेश दिया था पदोन्नति पर रोक नहीं लगाई गई परंतु राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने उस दौरान पदोन्नति पाए कर्मचारियों को रिवर्ट ना करते हुए अंतिम फैसला आने तक यथावत रखने को कहा था सुप्रीम कोर्ट ने भी पदोन्नति पर रोक नहीं लगाई इधर राज्य सरकार ने 12 मई 2016 से पदोन्नति पर रोक लगाई हुई है
भत्तो और पेन्सन में हो रहा है नुकसान
पदोन्नति के बगैर सेवानिवृत्त होने का नुकसान कर्मचारियों को जीवन भर रहेगा दरअसल वरिष्ठ पद न मिलने पर पेंशन और भक्तों की राशि में बढ़ोतरी होती है जबकि ऐसे मामले में ज्यादातर मामलों में संबंधित कर्मचारियों को वरिष्ठ वेतनमान दिया जा चुका है बस वरिष्ठ पद से सेवानिवृत्त होने का तमगा जरूर नहीं मिल पा रहा है दोनों पक्ष कर चुके हैं निवेदन आरक्षण को लेकर फिर भी पदोन्नति अटकी हुई है
मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में पदोन्नति देने पर फिर बनेगी लिस्ट
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय में पदोन्नति हेतु बहुत से पद खाली रहने के कारण सभी पुलिस इकाइयों को फिर से सीट सूची बनाने के निर्देश जारी कर दिए गए जारी किए गए निर्देश में कहा गया है कि आरक्षक से प्रधान आरक्षक तक एवं प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक के पद पर विभिन्न इकाईयों द्वारा एवं पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के द्वारा उपरोक्त पदों के अतिरिक्त सहायक उपनिरीक्षक से उप निरीक्षक के पद पर एवं उप निरीक्षक से निरीक्षक के पद पर कार्यभार देने की विगत वर्ष में की जा चुकी है विभिन्न उच्च पद पर कार्यभार देने से सेवानिवृत्त से प्रतिनियुक्ति पर जाने से विभागीय जांच या वार्षिक गोपनीय चरित्रावली उपलब्ध नहीं होने से अधिकारी या कर्मचारी द्वारा उच्च पद ग्रहण करने से इनकार करने से एवं अन्य कारणों से वर्तमान उच्च पद रिक्त हो गए हैं आवेदन प्राप्त हो रहे हैं तथा साथ ही इन इकाइयों में विगत वर्ष में बनाई गई योग्यता सूची समाप्त हो गई है इसलिए उच्च पद पर रिक्त होने पर एवं उपयोगिता के सूची लिस्ट समाप्त होने पर फिर से सक्षम स्तर पर कार्रवाई की जा रही है या कार्रवाई प्रतिवर्ष अनुसार जनवरी एवं जुलाई जाना है वर्तमान में प्रत्येक संवर्ग के अधिक संख्या में उपलब्ध किए जाने हेतु त्वरित कार्रवाई की जाना है और इस कार्रवाई के समय वर्तमान स्थिति में यह वर्ष के अंत तक का उचित होने वाले अधिकारी कर्मचारियों को जोड़कर स्कूल से 25% अधिक उपयुक्त की सूची बनाई जा रही है

