जीतना है तो बहरे बनो ?
जो व्यक्ति एक एक करके धीरे धीरे इन्हे त्यागने में जितना सफल होता है वह अपने दुख कष्ट और संकटों से पार पा जाता है जब तक व्यक्ति अपनी नकरतमकता को पहचान कर उसको अपने ऊपर हावी नहीं होने देगा उसी व्यक्ति का अपने लक्ष्य तक पहुँचना संभव होता है ,ये बात हम आपको एक छोटी सी कहानी के माध्यम से समझाते है
“एक बार छोटे छोटे कछुओ के एक ग्रुप ने दोड़ प्रतियोगिता आयोजित की उनका aim था एक पहाड़ के शिखर ( top ) पर पहुँचना , दोड़ प्रतियोगिता देखने के लिए कछुओ की काफी भीड़ जमा हो गयी , भीड़ में मोजूद अनेक कछुए यह विश्वास नहीं कर पा रहे थे की वास्तव में ये छोटे छोटे कछुए इतने ऊंचे पहाड़ के टॉप पर पहुच पाएगे ,
भीड़ में मोजूद सभी अजीबो गरीब बाते कर रहे थे क्योंकि पहाड़ के टॉप पर पहुचने का रास्ता बहुत ही कठिन था तो कुछ ने कहा की इनमे से कोई भी पहाड़ के टॉप पर नहीं पहुच पाएगा यह पहाड़ बहुत ही ऊंचा है ये छोटे छोटे कछुए सफल हो जाए इसकी कोई गारंटी नहीं है
ऐसी बाते सुन सुन कर छोटे कछुए हिम्मत हारने लगे सिर्फ व्ही कछुए बचे जिनके अंदर अभी जोश और उम्मीद थी वे तेजी से ऊपर चढ़ते जा रहे थे और भीड़ उनका मनोबल गिरा रही थी वे लगातार बोल रहे की बहुत ही कठिन है इतने ऊंचे पहाड़ के टॉप पर पहुँचना ..............
फिर क्या हुआ ..................
कितने ही कछुए थककर गिर गए और भीड़ के ताने सुन सुन कर कुछ अन्य कछुए भी हार मानने लगे
लेकिन उन्ही में से एक कछुआ लगातार उचाई चढ़ता जा रहा था भीड़ की बातों का उस पर कोई असर नहीं नहीं हो रहा था
आखिर उसने हार नहीं मानी end में सारे कछुए भीड़ की बाते सुन सुन कर हार मानकर बैठ गए ,लेकिन वह नन्हा कछुआ आगे बढ़ता गया और आखिर में वह पहाड़ के Top पर पहुच गया ऐसे में थककर बैठ गए सारे कछुए यह जानना चाह रहे थे की इस अकेले के लिए यह रेस जितना कैसे संभव हुआ एक छोटे प्रतिभागी कछुए ने जीतने वाले कछुए से पूछा की इस लक्ष्य फूचने की ताक़त तुम्हें कहा से मिली तब पता चला की वह विजेता कछुआ बहरा था !
यही बात में आपसे कहना चाहता हु की जब भी लोग आपसे कहे की आप अपने Aim तक नहीं पहुच पाएगे तो बहरे बन जाइए , नकारात्मक लोगो की बातों को Ignore क्योंकि वे लोग आपके सपने और इछाओ को मार देते है हमेशा सकारात्मक सोचे !
इसलिए यही कहूँगा दोस्तो
“चलते चलो बढ़ते चलो जो कठिनाइया तुम्हारे सामने आएगी, वे तुम्हारी छोटी छोटी सफलताओ के साथ सुलझती जाएगी ,बढ़ते चलो उजाला हो जाएगा”
जी हाँ दोस्तो
इसलिए प्रसिद्ध कवि श्री हरिवंश राय बच्चन साहब ने क्या खूब कहा है कि -
“ लहरों से डरकर नोका पार नहीं होती और कोशिश करने वालो कि हार नहीं होती”

