आज के युग की सबसे बडी समस्या है चिंता ! प्रायः यह हर व्यक्ति जानता है कि चिंता कितनी हानिकारक है, चिंता हमारी शक्ति का पुरी तरह से नाश कर देती है चिंता विचारो को भ्रमित करती है चिंता के कारण व्यक्ति कुंठित हो जाता है हमें अस्पतालो मे प्रायः ऐसे रोगी देखने को मिलेगें जिन्हे चिंता करने की प्रवृति ने रोगी बना दिया है जिसके कारण उनके स्वास्थ्य का नुकसान हो रहा और वे अल्पआयु हो गये है
चिंता पर विजय पाने के लिये यहा व्यवहारिक सरल और प्रेरणादायक बात हम प्रसिद्द लेखक ’टामस कार्लाइल ’ के कथन के माध्यम से समझाते है
’’ दुरस्थ तथा संदिग्ध कार्यो को छौडकर सन्निकट एवं निश्चित कार्यो को हाथ में लेना ही हमारा मुख्य ध्येय होना चाहिये ‘‘
जैसा की आज के विधार्थियो को निर्णायक परिक्षा में सफलता प्राप्त करने की अत्यधिक चिंता रहती है कि वे अपनी जिविका कैसे कमाए , ऐसी अनेक चिंताए उन्है घेरे रहती है ।
हम यहाॅ बात करते है महान क्रिकेट खिलाडंी सचिन तेंदुलकर की जिन्हे क्रिकेट का भगवान कहा जाता है उनकी इस महान सफलता का राहस्य है उनका ’’ आज की परिधी में रहना ’’ इसलिये मेरा आप सब से विनय है कि आप अपने मस्तिष्क रुपी यंत्र को काबु में रखना सीखिये जिससे आप आज की परिधी में रह सके और आपका जीवन सुरक्षित हो जावे , जीवन के प्रत्येक स्तर पर इस बात का प्रयोग करके देखे और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह प्रयोग आपको सुरक्षित कर रहा है ! कहने का मतलब ये है दोस्तो ‘‘ बिती ताहि बिसार दे! ‘‘ क्योकि जो बीत गया उसकी चिंता ने कितने ही लोगो को काल की राह में धकेल दिया है जो बीत गया और जो आने वाला है इस की चिंता के बोझ से प्रचण्ड पराक्रमी भी लडंखड़ज्ञ जाता है ! और जो बीत गया और जो आने वाला है उसे भुल जाइए आपका ‘ कल ‘ आज ही है क्योकि ‘कल‘ नाम की कोई वस्तु है ही नही !
भविष्य की चिंता करने से अपनी ही शक्ति नष्ट होती है इसलिये हमें आज की परिधी में रहने की आदत डालना चाहिये । हम ये नही कहते की आप भविष्य के विषय में सोचे ही नही !जरुर सोचे ,पर इसका उपाय यह होना चहिये की हम अपनी बुद्दि , उत्साह के साथ आज का काम उतम तरीके से करने मे जुट जाये जैसे की हमें अपने दिन की शुरुआज ईश्वर की प्रार्थना से शुरु करें -
‘‘ हे ईश्वर केवल आज का भोजन जुटा दो ‘‘
यानि की प्रार्थना आज के भोजन के लिये करों , कहने का मतलब ये है दोस्तो ‘‘कल की चिंत मत करो कल अपनी सुध आपने आप ही ले लेगा ‘‘ लेकिन फिर भी चिंता ऐसी चीज है हो ही जाती है जैसे की परिवार की सुरक्षा की चिंता ,बुढ़ापे में भरण पोषण की चिंता ,तो ठीक है भविष्य के लिये योजना जरुर बनाये ,पर यहा प्रभु ईसा के शब्दो को समझने की कोशिश जरुर करे ‘‘ कल की चिंता छौड़ दो ‘‘ मतलब कल पर विचार जरुर करो ,उसका मनन करो ,योजना बनाओं ,तैयारी करों किंतु चिंता मत करो ।
इसलिये सरल शब्दो में रोमन कवि होरस ने अपनी रचना में समझाया है कि
‘‘ सुखी मानव तो वही है
जो आज को अपना बना ले
और हो आश्वस्त कह दें
जी लिया बस आज में तो
‘कल‘ जो करना हो तु कर ले ।‘‘
इसलिये आज को हाथ से मत जाने दो आज का पुरा उपयोग करो और जी भर के जियो यारों ।

