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जबलपुर स्थित HIGH COURT ऑफ़ मध्य प्रदेश ने जनजातीय कार्य विभाग, मध्य प्रदेश में नवनियुक्त लगभग 140 शिक्षकों की नियुक्ति स्कूल शिक्षा विभाग में दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
स्कूल शिक्षा के लिए परीक्षा दी थी, परंतु नियुक्ति MP TRIBAL डिपार्टमेंट में हो गई है
उल्लेखनीय बात यह है कि शासन की शिक्षक नियुक्ति की नीति के अनुसार, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा संयुक्त पात्रता परीक्षा वर्ष 2018 में आयोजित की गई थी, पहले स्कूल शिक्षा में नियुक्ति हेतु रूल बुक जारी हुई थी इसके तत्पश्चात, अनुपूरक नियम द्वारा , स्कूल शिक्षा हेतु प्रस्तुत आवेदन के अनुसार जनजातीय विभाग हेतु मान लिए गए थे, पात्रता परीक्षा 2018 के अनुक्रम में ज्वाइंट चयन काउंसिलिंग आयोजित नही की जाकर, MP TRIBAL द्वारा, शिक्षक नियुक्ति हेतु पृथक काउंसिलिंग आयोजित की गईथी मेरिट के आधार पर, नियुक्ति आदिवासी विकास के अधीन दी गई।
लोक शिक्षण संचालनालय के इस विवादित नियम से उपजा विवाद
इसके बाद स्कूल शिक्षा द्वारा भी काउंसलिंग आयोजित की गईथी MP TRIBAL में नियुक्त शिक्षकों को भी काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर, आयुक्त लोक शिक्षण द्वारा ही दिया गया लेकिन स्कूल चयन के समय, उन्हे आदिवासी विकास में पूर्व नियुक्ति के आधार पर, च्वाइस फिलिंग से वंचित कर दिया गया था
आदिवासी विकास विभाग में चयनित व नियुक्त शिक्षकों को स्कूल शिक्षा विभाग में नियुक्ति एवम चॉइस फिलिंग से अपात्र किए जाने के अनिल साहू व 139 अन्य उच्च माध्यमिक/माध्यमिक शिक्षकों ने उच्च न्यायालय जबलपुर में स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के विरूद्ध रिट याचिका दायर की थी। शिक्षको की ओर से उच्च न्यायालय जबलपुर के वकील श्री अमित चतुर्वेदी ने सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय को बताया कि दोनो विभागों के भर्ती नियमों व अन्य संशोधित भर्ती नियमों एवम चयन प्रक्रिया को शासित करने वाले आदेशों में ऐसा कोई प्रतिबंध नही है कि MP TRIBAL में नियुक्त शिक्षक, स्कूल शिक्षा विभाग में नियुक्ति हेतु पात्र नही है।
इसलिए शासन का यह कार्य संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 उल्लंघन है। आदिवासी विकास में नियुक्त शिक्षक तथा स्कूल शिक्षा के विभागीय आदेशों के पालन में ही चयन प्रक्रिया में शामिल हुए थे। ज्वाइंट चयन प्रकिया से वंचित किए जाने के कारण ही , विसंगति व भेदभाव उत्पन्न हुआ है।
MP TRIBAL में नियुक्त शिक्षकों को, स्कूल शिक्षा में नियुक्ति प्राप्त करने हेतु, वैध पात्र होने के उपरांत भी, स्कूल शिक्षा में नियुक्ति हेतु अपात्र करना तथा एक कृत्रिम वर्ग का निर्माण करना है, जिससे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होना है जो कृत्रिम वर्गीकरण को भी निषिद्ध करता है।
मेरिट सूची में उच्च स्थान प्राप्त के बाद, ऐसा कोई नियम नहीं है, जिससे की आदिवासी विकास में नियुक्त शिक्षक, स्कूल शिक्षा में नियुक्ति से वंचित किए जा सकें।
सुनवाई के बाद, HIGH COURT की एकल पीठ ने शासन से जवाब तलब करते हुए, याचिकाकर्ता शिक्षकों को चॉइस फिलिंग में भाग लिए जाने का अंतरिम आदेश माह फरवरी - मार्च में पारित किया था , परंतु, समान केस खारिज हो जाने के कारण, कोर्ट द्वारा पारित आदेश का पालन नहीं हो सका था। सिंगल बेच द्वारा खारिज आदेश को, युगल पीठ/डबल बेंच में चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट की डबल बेंच द्वारा द्वारा, शासन के पक्ष में किए गए आदेश को स्टे कर दिया गया था। अधिवक्ता अमित चतुर्वेदी उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा, HIGH COURT जबलपुर की सिंगल बेंच का ध्यान, डबल बेंच द्वारा पारित आदेश की ओर ध्यानाकर्षण किया।
सुनवाई के बाद HIGH COURT द्वारा, डबल बेंच के आदेश के प्रकाश में पुनः अंतरिम आदेश जारी करते हुए, आयुक्त लोक शिक्षण को आदेश दिया गया है कि, MP TRIBAL में नियुक्त एवम स्कूल शिक्षा में चयनित शिक्षकों को स्कूल शिक्षा की शालाओं में चॉइस फीलिंग का अवसर दिया जावे। साथ ही यह आदेश दिया है कि कोर्ट की अनुमति के बिना परिणाम घोषित नही किए जावे। कोर्ट का आदेश सिर्फ याचिकाकर्ताओं के लिए है।

