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| image Source-Hindustan Times |
ऐक्टर: ईशान खट्टर,मृणाल ठाकुर,प्रियांशु पेनयुली,सोनी राजदान,इनामुलहक,चंद्रचूड़ राय
डायरेक्टर : राजा कृष्ण मेनन
श्रेणी: हिन्दी , युद्ध , ड्रामा
अवधि :2 Hrs 20 Min
Story of 'Pippa'
'पिप्पा' एक biopic war-drama film है। फिल्म की कहानी भारत की 45 कैवलरी रेजिमेंट के कैप्टन बलराम सिंह मेहता व उनके भाई बहनों के आसपास ही घूमती है, जिन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान के युद्ध के दौरान ईस्टर्न फ्रंट पर 'गरीबपुर की लड़ाई' में बहादुरी का अद्भुत कारनामा किया था ।
Movie Review: Pippa
जब आप कोई ऐसी कोई बायोपिक देख रहे हैं, जो की वॉर ड्रामा पर आधारित होती है तो यही उम्मीद रहती हैं कि वह देशभक्ति, राष्ट्र के लिए व जुनून से भरपूर होगी। राजा कृष्ण मेनन की इस फिल्म में भारत की उदारता भी है , क्योंकि उन्होंने बांग्लादेश liberation war (1971) में अपना योगदान दिया था। केंद्र में 45 कैवलरी रेजिमेंट के कैप्टन बलराम 'बल्ली' सिंह मेहता (ईशान खट्टर) हैं, जो की एक अपरंपरागत सैनिक है व अपने सीनियर्स के आदेश के खिलाफ जाकर के काम करता है।
इस फिल्म का नाम PT-76 टैंक के नाम पर ही रखा गया है, जिसे कैप्टन बल्ली ने संचालित करता है । यह इस टैंकर के प्रति उनके शौक और लगाव को भी दिखाता है। लेकिन इस फिल्म की कहानी आदमी व मशीन के बीच इस रिश्ते पर ज्यादा समय नहीं देती है। फिर भी, यह फिल्म इस मायने में तो बहुत खास है कि कैसे भारत के बहादुर सैनिकों ने अपने पड़ोसी देश के लिए कर्तव्य की पुकार पर ही अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया था। यह फिल्म एक युवा व साहसी कैप्टन बल्ली के बारे में बनाई गयी है। यह पश्चिमी की व पूर्वी पाकिस्तान के साथ के संघर्ष के संक्षिप्त इतिहास के पश्चात यह फिल्म इस बात को बताती है की ,कैसे हमने ,हम,ने एक राष्ट्र के रूप में , न्याय व इंसानियत को चुना है और मानवता के साथ खड़े भी रहे। यह फिल्म एक अच्छी तरह बनाई गई युद्ध फिल्म है , जो की सिर्फ कैप्टन बल्ली की बहादुरी पर ही केंद्रित नहीं है। यह उनके भाई तथा बहनों , बड़े भाई मेजर राम ( प्रियांशु पेनयुली ) व बहन राधा ( मृणाल ठाकुर ) पर भी फोकस करती है। ये दोनों भाई बहन एन्क्रिप्टेड मैसेजेज के मास्टर डिकोडर थे , जो की 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को जीतने में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।
इस फिल्म के लेखक रविंदर रंधावा, तन्मय मोहन और राजा मेनन कहानी कहने की इस कला में अपनी अच्छी महारत दिखाते हैं। क्योंकि 2 घंटे 20 मिनट की इस फिल्म मे में वह संक्षेप में कैप्टन बल्ली के पारिवारिक जीवन व उनके जीवन पृष्ठ के साथ साथ ही उनकी पर्सनैलिटी, के साथ साथ ही यह भी दिखाती है की सभी तमाम लोगों व घटनाओं ने उनके व्यक्तित्व पर किस तरह से अच्छा प्रभाव डाला है, फिल्म का सबसे खूबसूरत भाग इस की कहानी को लेकर जो की ईमानदारी से फिल्मायी गयी है । ईस्टर्न फ्रंट के युद्ध दृश्य के सीन में भयावहता य, असहाय लोगों पर किए गए अत्याचारों को भी दिखाए बिना भी प्रमाणिक तरीके से ही फिल्माया गया है। युद्ध की तरफ ले जाने वाले सीक्वेंस कभी कभी तो अपनी रफ्तार को खो देते हैं , लेकिन फिर भी कुल मिलाकर कहानी आपको अपनी तरफ खींचती है।
एआर रहमान संगीतकार का साउंडट्रैक फिल्म में जोश भी भरता है। खासकर तो एमसी हेम व क्रिस्टल गरीब के 'रैम्पेज' तथा शिल्पा राव जुबिन नौटियाल के 'जज्बात', दिल और दिमाग पर भी असर छोड़ देते हैं।
इस फिल्म मे ,चाहे एक साहसी युवा सैनिक के तौर पर हो या की नेतृत्व व सूझबूझ का प्रदर्शन करने वाला हो , ईशान खट्टर अपने किरदार के साथ साथ न्याय किया हैं। अनुशासित व बहादुर मेजर राम मेहता के रोल में तो प्रियांशु पेनयुली ने भी बहुत अच्छा काम किया है। दोनों ने ही पर्दे पर एकसाथ बहुत शानदार काम किया हैं ,फिर चाहे तो भाइयों के बीच तनावपूर्ण रिश्ते को दिखाना हो या की बाद में इस रिश्ते के आए बदलाव की बारे मे हो ,फिल्म मे हर मोर्चे पर दोनों की केमिस्ट्री एक साथ जमती है। इस फिल्म मे मृणाल ठाकुर ने भी अपना कामबहुत अच्छे से निभाया है। इस फिल्म में एक घटिया पाकिस्तानी सैनिक की भूमिका में तो इनामुलहक , शिबली व युद्ध के नायक भाइयों की मां के रोल में सोनी राजदान ने अपना रोल बड़ी खूबसूरती के साथ साथ निभाया है।
फिल्म को क्यों देखें- फिल्म 'पिप्पा ' वार पर आधारित एक ऐसी फिल्म है जो , जिसे एक बार तो जरूर देखा ही जाना चाहिए। यह खासकर मानवता के लिए खड़े होने के लिए भारत देश की भावना को यह फिल्म एक दिल से दी गई श्रद्धांजलि मानी जा रही है।